श्री परेश रसिकलाल राणपरा निदेशक (कार्मिक)डीआईएन : 10183476
श्री परेश रसिकलाल राणपरा विद्युत क्षेत्र में समृद्ध एवं विविधतापूर्ण अनुभव रखने वाले एक अनुभवी मानव संसाधन नेतृत्वकर्ता हैं, जिन्होंने राज्य एवं केंद्रीय, दोनों ही सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों में सेवाएं दी हैं। उनकी पेशेवर यात्रा लगभग 600 कार्मिकों वाले संगठनों से लेकर 60,000 से अधिक कार्मिकों वाले उपक्रमों तक विस्तृत रही है, जिसके कारण उन्हें विभिन्न संगठनात्मक आकारों, जटिलताओं एवं कार्मिक प्रबंधन परिवेशों का व्यापक अनुभव प्राप्त हुआ है। जमीनी स्तर से लेकर बोर्ड-स्तरीय नेतृत्व तक कार्य करते हुए, वे संगठनात्मक गतिशीलता, परिवर्तन प्रबंधन एवं कार्यनीतिक मानव संसाधन प्रबंधन की गहन अंतर्दृष्टि रखते हैं।
गुजरात की विद्युत क्षेत्र की जनोपयोगी सेवा इकाईयों, यथा एमजीवीसीएल एवं जीयूवीएनएल, में अपने कार्यकाल के दौरान उन्होंने बढ़ती व्यावसायिक आवश्यकताओं की पूर्ति हेतु बड़े पैमाने पर भर्ती पहलों का सफलतापूर्वक नेतृत्व किया। तीव्र गति से बदलते ऊर्जा परिदृश्य एवं नवीकरणीय ऊर्जा के बढ़ते प्रवेश को ध्यान में रखते हुए, उन्होंने ऊर्जा परिवर्तन एवं लोड पूर्वानुमान हेतु समर्पित विंग स्थापित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। इसके साथ ही, उन्होंने कार्यनीतिक जनशक्ति नियोजन पहलों का भी नेतृत्व किया तथा समूह की कंपनियों में कार्यबल की क्षमताओं को भावी व्यावसायिक आवश्यकताओं के अनुरूप बनाने हेतु कौशल संवर्धन एवं पुनर्कौशल विकास कार्यक्रमों को बढ़ावा दिया।
श्री राणपरा, कर्मचारी सहभागिता एवं संगठनात्मक विकास से गहनता से जुड़े रहे हैं तथा उन्होंने सतत एवं सार्थक कार्मिक सहभागिता पहलों की शुरुआत की है। उन्होंने समूह की कंपनियों के साथ मिलकर मानव संसाधन नीति निर्धारण एवं सामंजस्य स्थापित करने पर भी घनिष्ठता से कार्य किया है, जिससे व्यावसायिक प्राथमिकताओं का समर्थन करते हुए निरंतरता सुनिश्चित हुई है।
मई 2023 में, राज्य के सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों में एक दीर्घ एवं सफल कार्यकाल के पश्चात, वे 'अनुसूची-ए' केंद्रीय सार्वजनिक क्षेत्र उपक्रम, ग्रिड कंट्रोलर ऑफ इंडिया लिमिटेड (ग्रिड-इंडिया) में बोर्ड स्तर पर निदेशक (कार्मिक) के रूप में कार्यभार ग्रहण किया। उन्होंने इस कार्यनीतिक नेतृत्व भूमिका में शीघ्र ही सामंजस्य स्थापित कर लिया तथा ग्रिड-इंडिया के विकसित होते दायित्व-क्षेत्र के अनुरूप मानव संसाधन नीतिगत सुधारों में महत्वपूर्ण योगदान दिया।
उन्होंने प्रतिष्ठित संस्थानों के साथ भागीदारी स्थापित करते हुए क्षमता निर्माण अवसंरचना को सुदृढ़ बनाकर अधिगम एवं विकास को कार्यनीतिक रूप दिया। दीर्घकालिक नेतृत्व निरंतरता सुनिश्चित करने हेतु, उन्होंने योग्यता संबंधी अवसंरचना पर आधारित उत्तराधिकार नियोजन पहलों को सफलतापूर्वक क्रियान्वित किया। इसके अतिरिक्त, उन्होंने क्षमता निर्माण के क्षेत्र में अंतरराष्ट्रीय परामर्शी कार्यों के लिए अवसरों की खोज की एवं उन्हें विकसित किया।
गुजरात की विद्युत क्षेत्र की जनोपयोगी सेवा इकाईयों, यथा एमजीवीसीएल एवं जीयूवीएनएल, में अपने कार्यकाल के दौरान उन्होंने बढ़ती व्यावसायिक आवश्यकताओं की पूर्ति हेतु बड़े पैमाने पर भर्ती पहलों का सफलतापूर्वक नेतृत्व किया। तीव्र गति से बदलते ऊर्जा परिदृश्य एवं नवीकरणीय ऊर्जा के बढ़ते प्रवेश को ध्यान में रखते हुए, उन्होंने ऊर्जा परिवर्तन एवं लोड पूर्वानुमान हेतु समर्पित विंग स्थापित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। इसके साथ ही, उन्होंने कार्यनीतिक जनशक्ति नियोजन पहलों का भी नेतृत्व किया तथा समूह की कंपनियों में कार्यबल की क्षमताओं को भावी व्यावसायिक आवश्यकताओं के अनुरूप बनाने हेतु कौशल संवर्धन एवं पुनर्कौशल विकास कार्यक्रमों को बढ़ावा दिया।
श्री राणपरा, कर्मचारी सहभागिता एवं संगठनात्मक विकास से गहनता से जुड़े रहे हैं तथा उन्होंने सतत एवं सार्थक कार्मिक सहभागिता पहलों की शुरुआत की है। उन्होंने समूह की कंपनियों के साथ मिलकर मानव संसाधन नीति निर्धारण एवं सामंजस्य स्थापित करने पर भी घनिष्ठता से कार्य किया है, जिससे व्यावसायिक प्राथमिकताओं का समर्थन करते हुए निरंतरता सुनिश्चित हुई है।
मई 2023 में, राज्य के सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों में एक दीर्घ एवं सफल कार्यकाल के पश्चात, वे 'अनुसूची-ए' केंद्रीय सार्वजनिक क्षेत्र उपक्रम, ग्रिड कंट्रोलर ऑफ इंडिया लिमिटेड (ग्रिड-इंडिया) में बोर्ड स्तर पर निदेशक (कार्मिक) के रूप में कार्यभार ग्रहण किया। उन्होंने इस कार्यनीतिक नेतृत्व भूमिका में शीघ्र ही सामंजस्य स्थापित कर लिया तथा ग्रिड-इंडिया के विकसित होते दायित्व-क्षेत्र के अनुरूप मानव संसाधन नीतिगत सुधारों में महत्वपूर्ण योगदान दिया।
उन्होंने प्रतिष्ठित संस्थानों के साथ भागीदारी स्थापित करते हुए क्षमता निर्माण अवसंरचना को सुदृढ़ बनाकर अधिगम एवं विकास को कार्यनीतिक रूप दिया। दीर्घकालिक नेतृत्व निरंतरता सुनिश्चित करने हेतु, उन्होंने योग्यता संबंधी अवसंरचना पर आधारित उत्तराधिकार नियोजन पहलों को सफलतापूर्वक क्रियान्वित किया। इसके अतिरिक्त, उन्होंने क्षमता निर्माण के क्षेत्र में अंतरराष्ट्रीय परामर्शी कार्यों के लिए अवसरों की खोज की एवं उन्हें विकसित किया।