भू-तापीय विद्युत का विकास
- एनएचपीसी को भारत में भू-तापीय विद्युत के विकास के लिए नव एव नवीकरणयोग्य ऊंर्जा मंत्रालय (एमएनआरई) द्वारा नोडल एजेंसी के रूंप में नियोजित किया गया है ।
- भारतीय भू-तापीय फील्डों के रैंकिग अध्ययन को वर्ष 2001-02 के दौरान अंतर्राष्ट्रीय परामर्शदाता मैसर्स जियोथर्मएक्स कारपोरेशन, अमेरीका के सहयोग से किया गया है । नीचे दिए गए क्रम के अनुसार विकास हेतु 6 सबसे अधिक संभाव्यता वाले भू-तापीय स्थलों की पहचान की गई है -
· छत्तीसगढ़ में तातापानी
· जम्मू एवं कश्मीर में पूगा
· गुजरात में कैम्बे ग्रेबन
· हिमाचल प्रदेश में मणिकरण
· झारखंड में सूरजकुंड
· जम्मू एवं कश्मीर में छूमथांग
- जून, 2008 माह में एमएनआरई में हुई बैठक में लिए गए निर्णय के आधार पर एनएचपीसी को डीपीआर तैयार करने और पूगा में 2 से 5 मेगावाट के भू-तापीय संयंत्र को स्थापित करने के चरण-1 का कार्य सौंपा गया है । तदनुसार, विभिन्न क्रियात्मक समूहों से प्राप्त कार्य आदानों और खनिज अन्वेषण निगम लिमिटेड(एमईसीएल) तथा परामर्शी फर्मों से प्राप्त बजटीय प्रस्ताव के आधार पर पूगा में 2 से 5 मेगावाट भू-तापीय विद्युत परियोजना के डीपीआर को तैयार करने के लिए सितम्बर, 2008 में एमएनआरई को एक प्रस्ताव प्रस्तुत किया गया था । अब, जम्मू एवं कश्मीर राज्य सरकार के विद्युत विकास विभाग द्वारा यह निर्णय लिया गया है कि पूगा भू-तापीय फील्ड को राज्य सरकार द्वारा विकसित किया जाएगा ।
एक वैकल्पिक स्रोत के रूंप में सौर ऊंर्जा
- सौर ऊंर्जा, सौर उष्मा और सौर प्रकाश उपकरणों के पर्यावरण अनुकूल उपयोग को वहां पर बढ़ावा देने पर विचार किया जा रहा है जो स्थल दूर हों तथा जहां ग्रिड शक्ति की अपनी सीमाएं हों या वह उपलब्ध न हों अथवा उसे डीजी सेटों के माध्यम से पूरा किया जा रहा हों । एनएचपीसी की निम्मो बाजगो जल विद्युत परियोजना हेतु 25 केडब्ल्यूपी सौर ऊंर्जा संयंत्र तथा 20 स्टैंड एलोन ट्यूबलाइटों हेतु एक पायलट परियोजना को परियोजना स्थल पर सफलतापूर्वक चालू किया गया है और वह पूर्णत: क्रियाशील है ।
- एनएचपीसी की अन्य परियोजनाओं में सौर ऊंर्जा के उपयोग हेतु उपयुक्त स्थलों की पहचान करने के प्रयास किए जा रहे है ।
3.75 मेगावाट दुर्गादुआनी मिनी टाइडल विद्युत परियोजना, सुंदरबन, पश्चिम बंगाल का विकास
- एमएनआरई, भारत सरकार ने इस परियोजना को आर एंड डी कार्यों के अंतर्गत निष्पादन हेतु एनएचपीसी को सौंपा है । डीपीआर को अद्यतन करने और 3.75 मेगावाट दुर्गादुआनी मिनी टाइडल विद्युत परियोजना, सुंदरबन, पश्चिम बंगाल के निष्पादन के लिए पश्चिम बंगाल सरकार के अधीन पश्चिम बंगाल नवीकरणयोग्य ऊंर्जा विकास एजेंसी तथा एनएचपीसी के मध्य एक समझौता-ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए गए है ।
पश्चिम बंगाल सरकार के अधीन पश्चिम बंगाल नवीकरणयोग्य ऊंर्जा विकास एजेंसी(डब्ल्यूबीआरईडीए) ने सुदूर डेल्टा क्षेत्र की ऊंर्जा मांगों को पूरा करने के लिए एक हल के रूंप में राज्य में टाइडल विद्युत उत्पादन की पहचान की है । परियोजना में सुंदरबन में गोसाबा द्वीप के साथ वाली दुर्गादुआनी क्रीक में छोटी टाइडल विद्युत परियोजना को स्थापित किया जाना परिकल्पित है जिसका उद्देश्य क्रीक के पूर्व में गोसाबा द्वीप और पश्चिम में बाली-बिजयनगर द्वीप के बाली-2 क्षेत्र की समूची जनसंख्या को विद्युत शक्ति मुहैया करवाना है ।
दुर्गादुआनी मिनी टाइडल विद्युत परियोजना में भारत के पश्चिम बंगाल राज्य में दक्षिण 24 परगना जिले के सुंदरबन क्षेत्र में अवस्थित दुर्गादुआनी क्रीक में निम्न एवं उच्च टाइड के मध्य उपलब्ध लगभग 4 मीटर के हैड का उपयोग परिकल्पित है । लगभग 3.75 मेगावाट की विद्युत संभाव्यता का उपयोग एकल-बेसिन एकल-प्रभाव टाइडल विद्युत विकास के माध्यम से किया जाना प्रस्तावित है ।
नव एवं नवीकरणयोग्य ऊंर्जा मंत्रालय(एमएनआरई), भारत सरकार में आयोजित बैठक में लिए गए एक निर्णय के आधार पर 3.75 मेगावाट दुर्गादुआनी मिनी टाइडल विद्युत परियोजना की डीपीआर को अद्यतन करने और इसके निष्पादन हेतु पश्चिम बंगाल सरकार की पश्चिम बंगाल नवीकरणयोग्य ऊंर्जा विकास एजेंसी तथा एनएचपीसी लिमिटेड के मध्य एक समझौता-ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए गए है ।
तदनुसार, एनएचपीसी ने अद्यतन डीपीआर हो डब्ल्यूबीआरईडीए को प्रस्तुत कर दिया है । परियोजना को एमएनआरई में आयोजित एक बैठक में निष्पादन के लिए अनुमोदित किया गया है । डीपीआर के अनुसार परियोजना के निष्पादन हेतु डब्ल्यूबीआरईडीए से एक स्वेच्छा-स्वीकृति प्राप्त हुई है । परियोजना का वित्त-पोषण एमएनआरई द्वारा किया जा रहा है ।