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वार्षिक समीक्षा

वार्षिक समीक्षा 2010-11

 

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वार्षिक समीक्षा 2010-11

वर्ष 1975 में गठित एनएचपीसी लिमिटेड, जिसे पहले नैशनल हाइड्रोइलैक्ट्रिक पावर कारपोरेशन लिमिटेड के नाम से जाना जाता था, भारत सरकार की मिनीरत्न श्रेणी-I कम्‍पनी है जो देश के विभिन्न भागों में जलविद्युत परियोजनाओं के निर्माण तथा विद्युत के उत्पादन में सक्रिय रूप से संलग्‍न है आज एनएचपीसी देश में अति आवश्यक पीकिंग विद्युत आपूर्तिकर्ता संगठन है जो विशेष रूप से उत्तरी तथा पूर्वी भागों को विद्युत आपूर्ति कर रहा है। एनएचपीसी दिनांक 01.9.2009 से एनएसई तथा बीएसई में एक सू‍चीबद्ध कंपनी है । 

 

शुद्ध लाभ :

कंपनी ने 2166.67 करोड़ रुपए का अब तक का सबसे अधिक कर पश्‍चात शुद्ध लाभ अर्जित किया, जोकि वर्ष  2009-10 के दौरान अर्जित 2090.50 करोड़ रुपए के कर पश्‍चात शुद्ध लाभ से 3.64% अधिक है

 

बिक्री तथा राजस्व वसूली:

पिछले वर्ष के 4153.21 करोड़ रुपए की तुलना में 4046.59 करोड़ रुपए का बिक्री टर्न-ओवर दर्ज किया । पिछले वर्ष की बिक्री आंकड़े में 844.14 करोड़ रुपए की बकाया राशि शामिल थी । पिछले वर्ष की 97% बिक्री वसूली की तुलना में इस वर्ष 100% बिक्री वसूली की गई

 

संचालित पावर स्टेशन तथा विद्युत उत्पादन:

वर्तमान में एनएचपीसी 5295 मेगावाट की कुल संचित क्षमता के साथ 14 जलविद्युत स्टेशनों का संचालन करती है, जिसमें एनएचडीसी लिमिटेड की 1000 मेगावाट की इन्दिरा सागर तथा 520 मेगावाट की ओंकारेश्वर परियोजनाएं शामिल हैं एनएचडीसी लिमिटेड, एनएचपीसी और मध्य प्रदेश सरकार का एक अनुषंगी संयुक्त उद्यम है एनएचपीसी ने वर्ष के दौरान "उत्‍कृष्‍ट" समझौता ज्ञापन रेटिंग हेतु 18000 मिलियन यूनिट के लक्ष्य की तुलना में अपने स्वयं के पावर स्टेशनों से 18606 मिलियन यूनिट (एमयू) बिजली का उत्पादन किया। कंपनी के संचालित पावर स्टेशनों ने "उत्कृष्ट" रेटिंग हेतु 79.9% के समझौता ज्ञापन लक्ष्य की तुलना में 85.2% का संयंत्र उपलब्धता कारक (पीएएफ) प्राप्त किया लोकतक, सलाल, चमेरा-I, उड़ी, दुलहस्ती पावर स्टेशनों से उत्‍कृष्‍ट रेटिंग हेतु लक्ष्य से अधिक विद्युत उत्‍पादन प्राप्त किया गया।

 

पूँजी व्‍यय:

एनएचपीसी का वर्ष 2011-12 हेतु कैपेक्‍स प्‍लान 5090 करोड़ रूपये का है। ग्‍यारहवीं योजना अवधि के लिए समग्र कैपेक्‍स 18813 करोड़ रूपये का रखा गया है, जिसे आंतरिक संसाधनों, भारत सरकार से प्राप्‍त अधीनस्‍थ ऋण, बाजार से लिए गए ऋण और आई.पी.ओ. से प्राप्‍त राशि के द्वारा पूरा किया जाएगा।

 

निर्माणाधीन परियोजनाएं:

4502 मेगावाट की कुल संस्थापित क्षमता की 10 परियोजनाएं सक्रिय रूप से निमार्णाधीन हैं इन परियोजनाओं के पूरा होने पर एनएचपीसी की क्षमता अगले पांच वर्षों में 9500 मेगावाट हो जाने की प्रत्‍याशा है। (परियोजनाओं के ब्यौरे अनुबंध-क पर संलग्न हैं)

 

सरकार से स्वीकृति हेतु प्रतीक्षारत परियोजनाएं :

एनएचपीसी 9651 मेगावाट की संचित क्षमता की अनेक जलविद्युत परियोजनाओं हेतु भारत सरकार से स्वीकृति लेने के लिए सक्रिय रूप से अनुवर्ती प्रयास कर रही है। इनमें से 5965 मेगावाट संचित क्षमता की 7 परियोजनाओं को एनएचपीसी द्वारा स्वयं क्रियान्वित करने की योजना है। अन्य परियोजनाओं को संयुक्त उद्यम के माध्यम से क्रियान्वित किए जाने की योजना है, जिनमें 66 मेगावाट की लोकतक डाउनस्ट्रीम परियोजना मणिपुर सरकार के साथ, 2120 मेगावाट क्षमता की तीन परियोजनाएं जम्मू एवं कश्मीर में जम्मू एवं कश्मीर सरकार के साथ और मणिपुर में 1500 मेगावाट तिपाईमुख परियोजना को एसजेवीएन लिमिटेड तथा मणिपुर सरकार के साथ भागीदार के रूप में निर्मित किया जाना है। (परियोजनाओं के ब्यौरे अनुबंध-क पर संलग्न हैं)

 

संयुक्‍त उपक्रम :

मणिपुर में 1500 मेगावाट की तिपाईमुख जलविद्युत (बहुउद्देशीय) परियोजना के निष्‍पादन के लिए एक संयुक्‍त उपक्रम कंपनी के गठन के लिए एनएचपीसी, एसजेवीएन लिमिटेड और मणिपुर सरकार के बीच एमओयू पर हस्‍ताक्षर हो गए हैं। इसमें एनएचपीसी, एसजेवीएन लिमिटेड और मणिपुर सरकार की हिस्‍सेदारी क्रमश: 69%, 26% और 5% की रहेगी।

जम्‍मू व कश्‍मीर राज्‍य में चिनाब नदी घाटी में लगभग 2100 मेगावाट की पकलदुल व अन्‍य जलविद्युत परियोजनाओं के निर्माण के लिए एक संयुक्‍त  उपक्रम कंपनी बनाने के लिए प्रोमोटर एग्रीमेंट हो गया है। इस एग्रीमेंट के अनुसार शेयरहोल्डिंग पैटर्न 49% (एनएचपीसी), 49% (जेकेएसपीडीसी) और 2% (पीटीसी) का होगा।

उड़ीसा में 300 मेगावाट की सिंडोल-।, ।। और ।।। जलविद्युत परियोजनाओं के विकास के लिए उड़ीसा जलविद्युत कारपोरेशन (ओएचपीसी) के साथ एक संयुक्‍त उपक्रम का गठन करने के लिए एक एमओयू होना है, जो अंतिम चरण में है।

भारत-भूटान जलविद्युत पहल के अंतर्गत वर्ष 2020 तक 10000 मेगावाट की जलविद्युत क्षमता के दोहन के लिए भूटान की ड्रूक ग्रीन पावर कारपोरेशन(डीजीपीसी) के साथ हिस्‍सेदारी करने के लिए एनएचपीसी के साथ एक संयुक्‍त उपक्रम प्रक्रिया के माध्‍यम से भूटान में 670 मेगावाट की चखरछू-। जलविद्युत परियोजना के विकास के लिए भारत सरकार ने निर्णय ले लिया है। इसके लिए एमओयू को अंतिम रूप देने का कार्य अंतिम चरण में है।

 

विविधीकरण :

एनएचपीसी जल विद्युत क्षेत्र में अपनी अग्रणी स्थिति बनाए रखने और अपने व्यापार क्षेत्र के विस्तार हेतु भी प्रतिबद्ध है कंपनी अपनी अनुषंगी कंपनी एनएचडीसी के माध्यम से तापीय विद्युत व्यापार में प्रवेश कर रही है, जिसे मध्य प्रदेश सरकार द्वारा खंडवा जिले में 1320 मेगावाट रेवा तापीय विद्युत परियोजना के स्थापन का कार्य सौंपा गया है। इस परियोजना के लिए कोयले की आपूर्ति कहां से होगी, इसके लिए कोयला मंत्रालय, भारत सरकार से निर्णय की प्रतीक्षा है।

 

राजीव गांधी ग्रामीण विद्युतीकरण योजना (आरजीजीवीवाई) और प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना (पीएमजीएसवाई) :

कंपनी को भारत सरकार के एक फ्लैगशिप कार्यक्रम - राजीव  गांधी ग्रामीण विद्युतीकरण योजना (आरजीजीवीवाई) के अंतर्गत ग्रामीण विद्युतीकरण कार्य सौंपे गए हैं । यह कार्य बिहार, छत्तीसगढ़, जम्मू एवं कश्मीर, उड़ीसा तथा पश्चिम बंगाल राज्यों के 27 जिलों में फैला हुआ है जिसके अंतर्गत 29709 गाँवों     (9504 गैर-विद्यु‍तीकृत/अविद्यु‍तीकृत और 20205 आंशिक विद्युतीकृत गांव) का विद्युतीकरण किया जाना है और 20.49 लाख गरीबी रेखा से नीचे जीवन यापन करने वाले परिवारों को सर्विस कनेक्शन मुहैया करवाए जाएंगे, जिस पर लगभग 2900 करोड़ रुपए खर्च आएगा। वर्ष 2010-11 के दौरान एनएचपीसी ने 2667 गांवों का विद्युतीकरण किया और 7.48 लाख गरीबी रेखा से नीचे के परिवारों को सर्विस कनेक्शन प्रदान किए गए   31 मार्च 2011 तक एनएचपीसी ने 23051 गांवों का विद्युतीकरण किया है (8632 अन-इलैक्ट्रिफाइड/डी-इलैक्ट्रिफाइड और 14419 आंशिक रूप से विद्युतीकरण वाले गांवों) और 16.28 लाख बीपीएल परिवारों को सर्विस कनेक्‍शन प्रदान किया है

 

एनएचपीसी तीस्‍ता लो डैम-।।। और IV जलविद्युत परियोजनाओं से विद्युत की निकासी हेतु डब्‍लयुबीएसईटीसीएल के लिए डिपॉजिट आधार पर 220 के.वी. के पावर निकासी सिस्‍टम का निर्माण कार्य भी कर रही है। 31 मार्च, 2011 तक 626 टावरों के साथ 174.24 किलोमीटर की कुल लंबाई में से 412 टावरों के साथ 58.31 किलोमीटर लम्‍बाई लाइन के तार बिछा दिए गए हैं ।

 

एनएचपीसी को प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना (पीएमजीएसवाई) के अंतर्गत बिहार के 6 जिलों में ग्रामीण सड़कों के निर्माण तथा अनुरक्षण का कार्य सौंपा गया है, ये जिले हैं पूर्वी चंपारण, पश्चिमी चंपारण, शिवहर, सीतामढ़ी तथा वैशाली 1921 करोड़ रुपए की कुल लागत पर 3517 किलोमीटर कुल लम्बाई वाली 832 सड़कों के निर्माण हेतु ग्रामीण विकास मंत्रालय, भारत सरकार की स्वीकृति प्राप्त हो चुकी है 818.93 करोड़ रूपये की लागत से 1627 किलोमीटर कुल लम्बाई की 333 सड्को का निर्माण कार्य पूरा किया जा चुका हैं।

 

गुणवत्ता प्रबंधन:

निगम मुख्‍यालय सहित एनएचपीसी के 12 पावर स्टेशनों (एक पावर स्‍टेशन का प्रमाणीकरण प्रक्रिया अधीन है) के पास क्रमश: गुणवत्ता प्रबंधन प्रणाली आईएसओ 9001:2008, पर्यावरण प्रबंधन प्रणाली आईएसओ 14001:2004 और व्यावसायिक स्वास्थ्य तथा सुरक्षा प्रबंधन प्रणाली ओएचएसएएस 18001:2007 हेतु प्रमाणीकरण प्राप्‍त हैं। एनएचपीसी ने इससे आगे चलकर समेकित प्रबंधन प्रणाली आईएमएस और पीएएस 99 के अंतर्गत उपरोक्‍त प्रणालियों को एकीकृत किया है। वर्ष 2010-11 के दौरान, एनएचपीसी ने अपने पावर स्‍टेशनों के लिए एक आईएमएस और आईएसओ 14001 प्रमाणीकरण भी प्राप्‍त कर लिया है।

 

परामर्शी सेवाएं :

एनएचपीसी जलविद्युत के विभिन्न क्षेत्रों में देश के प्रमुख संगठनों को परामर्शी सेवाएं मुहैया करवा रही है। इन सेवाओं में शामिल है- नदी बेसिन अध्ययन, सर्वेक्षण कार्य, डिजाईन तथा अभियांत्रिकी, भू-वैज्ञानिक अध्ययन, भू-तकनीकी अध्ययन, हाइड्रोलिक ट्रांसियंट अध्ययन, जल विज्ञान अध्ययन, संविदा प्रबंधन, निर्माण प्रबंधन, उपकरण आयोजना, भूमिगत निर्माण, परीक्षण, चालू किया जाना, प्रचालन तथा अनुरक्षण आदि एनएचपीसी विश्व बैंक, एशियन डेवेलपमेंट बैंक, अफ्रीकी डेव्लपमेंट बैंक, कुवैत फंड फॉर अरब इकोनामिक डेवलपमेंट और केन्द्रीय जल आयोग के साथ जलविद्युत के क्षेत्र में एक परामर्शदाता के रूप में पंजीकृत है मुख्य परामर्शी कार्यों में राज्य विद्युत बोर्डो तथा सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों सहित केन्द्र तथा राज्य सरकार की एजेंसियों से मिले कार्य शामिल हैं।

 

01 अप्रैल, 2011 तक 82 परामर्शी कार्य पूरे किए गए और 18 कार्य चल रहे हैं वर्ष 2010-11 के दौरान 91.42 करोड़ रुपए के भुगतान प्राप्‍त हुए हैं। जिन संगठनों को वर्तमान में परामर्शी सेवाएं दी जा रही हैं, उनमें अंडमान एवं निकोबार प्रशासन, केआरसीएल, विदेश मंत्रालय (म्यांमार संघ जलविद्युत विभाग, म्‍यांमार संघ सरकार, ताजिकिस्तान में वारजोब-। पावर स्‍टेशन का निष्‍पादन और नवीनीकरण व आधुनिकीकरण, तथा ऊर्जा विभाग, भूटान शाही सरकार की जलविद्युत परियोजना), पीआईडीबी, पीजीसीआईएल, डब्ल्यूबीआरईडीए, डब्ल्यूबीपीडीसीएल, अथैना डिम्वे पावर प्राइवेट लिमिटेड शामिल हैं एनएचपीसी ने इससे पहले बीबीएमबी, बीएसएचपीसी, सीईए, सीएसईबी, सीडब्ल्यूसी, डीवीसी, अरूणाचल प्रदेश सरकार, बिहार सरकार, गोवा सरकार, मिजोरम सरकार, नागालैंड सरकार, केपीए, केएसईबी, एलएएचडीसी, उत्तरी रेलवे, एनटीपीसी, आरईसी, टीएचपीए, एसजेवीएनएल, टीएचडीसी, यूजेवीएनएल, सीईएस, आईसीआईसीआई, आईएफसीआई तथा जय प्रकाश हाइड्रो पावर लिमिटेड को भी परामर्शी सेवाएं प्रदान की हैं

 

 

विदेश में कार्य :

कंपनी विदेशों में अपने अंतर्राष्‍ट्रीय प्रचालनों को विस्‍तारित करने की योजना पर कार्य कर रही है और अपने गत परामर्शी कार्यों के माध्‍यम से अर्जित नेक नियती और वर्तमान संबंधों के सहारे अंतर्राष्‍ट्रीय स्‍तर पर उपलब्‍ध जलविद्युत संभाव्‍यता का दोहन करने में अपेक्षित मदद देनी चाहती है। एनएचपीसी के पास उपलब्ध विशेषज्ञता का उपयोग भूटान, म्यांमार तथा ताजिकिस्‍तान जैसे देशों में जल विद्युत विकास के क्षेत्र में किया जा रहा है

 

विद्युत मंत्रालय द्वारा वर्ष 2020 तक 10,000 मेगावाट जल विद्युत विकास हेतु भारत-भूटान सहयोग के अंतर्गत एनएचपीसी को भूटान में 22 करोड़ रूपये की लागत पर चमखरछु-I जलविद्युत परियोजना (670 मेगावाट) और 27 करोड़ रूपये की लागत पर कुरी गोंगरी परियोजना (1800 मेगावाट) की डीपीआर तैयार किए जाने हेतु कार्य सौंपे गए है। इस संबंध में ऊर्जा विभाग, भूटान की शाही सरकार और एनएचपीसी के बीच 22 दिसम्बर, 2009 को द्विपक्षीय करार पर हस्‍ताक्षर हो गए हैं। डीपीआर दिसम्बर, 2011 तक पूरी की जानी है। एनएचपीसी ने परियोजना स्‍थलों पर संसाधन जुटा दिए हैं और कार्यक्रमानुसार कार्य प्रगति पर है।

 

एनएचपीसी को परामर्शी कार्यों के रूप में म्यांमार में 1200 मेगावाट की तमांथी और 642 मेगावाट की श्‍वेजाये जलविद्युत और बहुउद्देशीय परियोजनाओं के अतिरिक्त अन्वेषण कार्य करने और डीपीआर अद्यतन करने का कार्य भारत सरकार के विदेश मंत्रालय द्वारा सौंपा गया है।

 

इन दोनों परियोजनाओं की डीपीआर को अद्यतन करने और अतिरिक्‍त अन्‍वेषण कार्य की लागत का खर्च, जो प्रत्‍येक परियोजना के लिए 20 करोड़ रूपये की लागत से कुल 40 करोड़ रूपये होती है, भारत सरकार के विदेश मंत्रालय द्वारा धन मुहैया कराया जा रहा है। इन परियोजनाओं को 18 महीने की अवधि में पूरा किया जाना है। भारतीय प्रतिनिधि मंडल और म्‍यांमार की संघ सरकार के विद्युत पावर नं. 1 मंत्रालय के बीच हुई बैठक में लिए गए नर्णियानुसार, तमंथी परियोजना की अंतरिम रिपोर्ट विदेश मंत्रालय, विद्युत मंत्रालय, भारत सरकार और म्‍यांमार संघ सरकार को अक्‍तूबर, 2010 में सौपी जा चुकी है। श्‍वेजाये परियोजना की अंतरिम रिपोर्ट     अप्रैल, 2011 में सौंपी जा चुकी है।

 

जिकिस्‍तान में वारजो जलविद्युत परियोजना के नवीनीकरण और आधुनिकीकरण का कार्य कार्यक्रमानुसार प्रगति पर है। मुख्‍य सिविल कार्य मार्च, 2011 में पूरे कर लिए गए हैं।

 

सूचना प्रौद्योगिकी एवं संचार :

एनएचपीसी अपनी कार्यकुशलता, उत्‍पादकता और लाभ को बढ़ाने के लिए सूचना प्रौद्योगिकी और संचार लागू करने के लिए हमेशा ही अग्रसर रहा है। गत तीन वर्षों में ईआरपी के सभी मोड्यूलों को कार्यान्वित करने के बाद संगठन के सभी मुख्‍य कार्यकलाप अधिकांशत: आईटी से युक्‍त हो गए हैं, जिनमें मुख्‍य ज़ोर निर्माणाधीन परियोजनाओं के परियोजना प्रबंधन और पावर स्‍टेशनों के प्रचालन व अनुरक्षण पर दिया गया है। सूचना प्रौद्योगिकी व संचार का आधारभूत ढांचा एनएचपीसी की 50 से अधिक अवस्थितियों तक फैला दिया गया है, जिसे सूचना प्रौद्योगिकी पर बढ़ती निर्भरता को बल देने के लिए प्रोन्‍नत किया गया है। सभी परियोजनाओं, पावर स्‍टेशनों और क्षेत्रीय कार्यालयों को निगम मुख्‍यालय से जोड़ने के लिए सैटेलाईट लिंक पर आधारित मल्‍टी-मोड कम्‍युनिकेशन नेटवर्क और एमपीएलएस/वीपीएन लिंक की स्‍थापना की गई है। संगठन की सभी सूचना परिसंपतियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए आई.टी सुरक्षा के पर्याप्‍त उपायों को भी अपनाया गया है। इन पहलुओं पर किए गए निवेश से अब संगठन को लाभ मिलने प्रारंभ हो गए हैं।

निर्माणाधीन परियोजनाओं की महत्‍वपूर्ण अवस्थितियों पर स्‍थापित किए गए कैमरों के माध्‍यम से वीडियो कांफ्रेंसिंग, लाइव विडियो फीड्स को सुदृढ़ करने के लिए निगम मुख्‍यालय स्‍तर पर एक ऑनलाइन प्रोजेक्‍ट मॉनिटरिंग सेंटर की स्‍थापना की गई है। इसके द्वारा वास्‍तविक और वित्‍तीय प्रगति आंकड़ों का विश्‍लेषण करना भी आसान हो गया है। संगठन की सभी अवस्थितियों के लिए महत्‍वपूर्ण घटनाओं/उदघोषणाओं/वरिष्‍ठ प्रबंधन द्वारा ब्रीफिंग करने की लाइव ब्राडकास्टिंग करने के लिए ऑनलाइन वेब कास्टिंग की सुविधा प्रदान की गई है।

एनएचपीसी ने आईटी सिस्‍टम और इसकी परिसंपत्तियों के प्रबंधन के लिए एक पॉलिसी की भी सृजना की है, ताकि इसका सुरक्षित ढंग से अधिकतम उपयोग किया जा सके।

 

अनुसंधान एवं विकास गतिविधियां :

स्वच्छ विकास प्रणाली (सीडीएम)- एनएचपीसी ने तीस्‍ता-V पावर स्‍टेशन के संबंध में स्‍वैच्छिक उत्‍सर्जन में कमी (वीईआर) योजना के अंतर्गत सीडीएम के साथ-साथ अन्‍य कार्बन व्‍यापार पहलुओं के परिप्रेक्ष्‍य में लाभों को प्राप्‍त करने हेतु प्रयास किए हैं, जो प्रगति पर हैं। इसके कारण एनएचपीसी को अतिरिक्‍त राजस्‍व प्राप्‍त होगा।

जम्‍मू व कश्‍मीर राज्‍य के लेह तथा कारगिल जिलों में अवस्थित निम्‍मो बाजगो (3 x 15 मेगावाट) और चुटक   (4 x 11 मेगावाट) की दो मध्‍य आकार की जलविद्युत परियोजनाओं को यूएनएफसीसीसी के सीडीएम एग्‍जीक्‍यूटिव बोर्ड के पास पहले ही पंजीकृत कराया जा चुका है। निम्‍मो-बाजगो और चुटक परियोजनाओं के संचालित होने पर वर्ष भर में क्रमश: 187,893 मिट्रिक टन कार्बन डाईआक्‍साईड (सीओ2) तथा        166,831 मिट्रिक टन कार्बन डाईआक्‍साइड (सीओ2) के बराबर उत्सर्जन कम करने में मदद मिलेगी। इसके बदले, एनएचपीसी को आगामी 07 वर्षों तक इन दोनों परियोजनाओं से अतिरिक्‍त राजस्‍व की प्राप्ति होगी, जिसे    सात-सात वर्षों की और दो अवधियों के लिए नवीनीकृत किया जा सकेगा।

 

  • कंप्‍युटेशनल फ्लूड डाइनामिक्‍स पर कार्य : एनएचपीसी, निगम मुख्‍यालय में जल प्रवाह प्रणाली (वॉटर कंडक्‍टर सिस्‍टम) की प्रवाह पद्धति का विश्‍लेषण करने के लिए कंप्‍युटेशल फ्लुड डाइनामिक्‍स (सीएफडी) की स्‍थापना की गई है। इन संबंध में सलाल, बैरास्‍यूल और लोकतक नामक तीन पावर स्‍टेशनों में पेनस्‍टॉक के जरिये जल प्रवाह का सीएफडी विश्‍लेषण कार्य पूरा हो गया है। सर्ज शाफ्ट और डैम-स्पिलवे के माध्‍यम से भी प्रवाह का जलीय अध्‍ययन करने के लिए सीएफडी विश्लेषण किया जा रहा है।
  • पावर स्‍टेशन की ऊर्जा लेखा परीक्षा : पावर स्‍टेशन के निष्‍पादन का आंकलन और अधिकतम उपयोग को ध्‍यान में रखकर, तीस्‍ता-V पावर स्‍टेशन की ऊर्जा लेखा परीक्षा का कार्य पूरा कर लिया गया है और पावर स्‍टेशन द्वारा ऊर्जा बचत में सुधार लाने संबंधी सिफ़ारिशों को कार्यान्वित किया जा रहा है।
  • अनुसंधान व विकास परियोजना के लिए राष्‍ट्रीय भावी योजना (एनपीपी) : एसजेवीएनएल, सीईए और एनएमएल के साथ हुए समझौता ज्ञापन के अंतर्गत, सिफ़ारिशों के जल में डूबे पुर्जों (कम्‍पोनेंट्स) में इस्‍तेमाल होने वाले और मशीनों की सिल्‍ट से होने वाले नुकसान से बचाव के लिए और उनमें बढ़िया घटकों (प्रोपर्टीज) की नव लौह सामग्री का इस्‍तेमाल हो, ताकि सिल्‍ट के कारण पुर्जों का नुकसान कम से कम हो और मशीनों का कार्यकाल बढ़े, इसके लिए विकास कार्य किया जा रहा है। विद्युत मंत्रालय, भारत सरकार ने केंद्रीय विद्युत अनुसंधान संस्‍थान (सीपीआरआई) के माध्‍यम से एनएचपीसी को एनपीपी के अंतर्गत उच्‍च जलीय दबाव के अंतर्गत जलयुक्‍त क्षेत्रों में सुरंग बनाने संबंधी परियोजना का प्रस्‍ताव 109.03 लाख रूपये की वित्‍तीय लागत पर 02 वर्षों की अवधि के भीतर अनुसंधान करने के लिए सौंपा है।
  • एनएचपीसी द्वारा सलाल पावर स्‍टेशन के नजदीक जम्‍मू कश्‍मीर में बिड्डा स्‍थान पर 8-10 मेगावाट की पवन ऊर्जा को विकसित करने की प्रक्रिया आरंभ की गई है।
  • चीन स्थित कटाव व तलछट भराव पर अंतर्राष्‍ट्रीय अनुसंधान और प्रशिक्षण केन्‍द्र (आईआरटीसीईएस) और एनएचपीसी के बीच समझौता-ज्ञापन पर हुए हस्‍ताक्षर के अनुसार तलछट भराव क्षेत्र में अनुसंधान करने और जलाश्‍य प्रबंधन में सहयोग करने का कार्य किया जाना है। एनएचपीसी से चमेरा-। और धौलीगंगा-। नामक दो जलाश्‍यों तथा आईआरटीसीईएस, चीन से बाजियाजुई व होंगशान नामक दो जलाश्‍यों को आपसी अनुसंधान के लिए चुना गया है। इन पर अनुसंधान कार्य प्रगति पर है।

 

मानव संसाधन विकास :

एमओयू में 85% की उत्‍कृष्‍ट रेटिंग हेतु लक्ष्य की तुलना में वित्‍तीय वर्ष 2010-11 के दौरान पावर स्टेशनों के संचालन तथा अनुरक्षण से संबंधित 98.5% कर्मचारियों को प्रशिक्षित किया गया।

 

एनएचपीसी को विदेश मंत्रालय द्वारा अफ्रीकी राष्‍ट्रों से आए प्रतिभागियों को हाइड्रोपावर स्‍टेशन के प्रचालन व अनुरक्षण पर प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित करने का अवसर प्रदान किया गया। यह कार्यक्रम चमेरा-। पावर स्‍टेशन में आयोजित किया गया, जिसे प्रतिभागियों से खूब सराहना मिली। एनएचपीसी को नाईजीरिया में व्‍यापार संभावनाएं तलाशने के लिए नाईजीरिया सरकार के विद्युत मंत्रालय से भी निमंत्रण प्राप्‍त हुआ है।

 

एनएचपीसी ने अपने मानव संसाधन को विकसित करने के लिए कई पहल प्रारंभ की हैं, जिसमें प्रमुख अकादमिक संस्थान जैसे कि आईआईटी-रूड़की, आईआईटी-दिल्ली, आईआईएम-बैंगलोर, आईआईएम-कोलकाता, आईएमएम-कोझीकोड, आईआईएम-इंदौर, आईआईएम-लखनऊ, एमडीआई-गुड़गांव, आईएमटी-गाजियाबाद, आईएसबी-हैदराबाद, एएससीआई-हैदराबाद, एएससीआइहैदराबाद, सीपीआरआई-बैगलौर, एनसीबी-बल्लभगढ, आईएसएम-धनबाद, राष्ट्रीय जल अकादमी (एनडब्ल्यूए)-पुणे आदि के साथ अधिगम संयुक्त उद्यम (एलजेवी) स्थापित करना शामिल है इसके अतिरिक्त, एबीबी, अरेवा, अलस्‍टाम, वीए-टेक, सीमंस आदि जैसे प्रतिष्ठित विनिर्माताओं के माध्यम से भी प्रशिक्षण तथा विकास कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं, ताकि कर्मचारियों को उन्नत तकनीकी से अवगत रखा जा सके।

 

कारपोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व :

एनएचपीसी ने एक सामाजिक रूप से जिम्‍मेदार कारपोरेट नागरिक होने के नाते डीपीई के मार्ग-निर्देशों के अनुरूप एक नई व्‍यापक सीएसआर पॉलिसी अपनाई है, जिसके अपनाने से कारपोरेट सामाजिक उत्‍तरदायित्‍व (सीएसआर) संबंधी गतिविधियों के आयाम को एक सार्थक व्‍यापकता प्राप्‍त हुई है। नई पॉलिसी अपनाने से लाभ की 0.5% राशि सीएसआर गतिविधियों के लिए निर्धारित कर दी गई है और इसके होने से सीएसआर फंड के लिए एक असमापन योग्‍य फंड का निर्माण हुआ है। सामुदायिक विकास पहलुओं में शामिल हैं हर्बल पार्कों का निर्माण, वनरोपण, जलग्रहण क्षेत्र सुधार, मत्‍स्‍य प्रबंधन, चिकित्‍सा/टीकाकरण कैंपों का आयोजन, ईर्द-गिर्द विकास, खेलकूद/सांस्‍कृतिक त्‍यौहारों, मेलों का आयोजन आदि।

दूर-दराज के क्षेत्र में शैक्षिक सुविधाएं बढ़ाने के उद्देश्‍य से एनएचपीसी ने निम्‍नलिखित क्षेत्रों में पहल की है:-

1.       तवांग, अरूणाचल प्रदेश में एनएचपीसी कॉलेज ऑफ साईंस, टेकनॉलाजी, आर्ट्स एवं कॉर्मस का निर्माण किया जाना।

2.       जम्‍मू व कश्‍मीर में श्रीनगर में हाइड्रो ट्रेनिंग इंस्‍टीट्यूट की स्‍थापना करना।

3.       हिमाचल प्रदेश के बिलासपुर में एनटीपीसी की भागीदारी के साथ इंजीनियरिंग कॉलेज की स्‍थापना करना।

4.       सिक्किम में एक नई आईटीआई के ढांचागत विकास के लिए लगभग 5 करोड़ रूपये की वित्‍तीय सहायता प्रदान करना।

इसके अतिरिक्‍त, एनएचपीसी ने तीन राज्‍यों अरूणाचल प्रदेश, जम्‍मू व कश्‍मीर और उत्‍तराखंड में औद्योगिक प्रशिक्षण संस्‍थानों (आईटीआई) को गोद लेकर राष्‍ट्रीय कौशल विकास मिशनके तहत अपनी सतत् प्रतिबधता जताकर योगदान दिया है, ताकि इन संस्‍थानों का उन्‍नयन एवं आधुनिकीकरण किया जा सके। पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप (पीपीपी)/तकनीकी प्रशिक्षण सुधार कार्यक्रम/उत्‍कृष्‍टता का केन्‍द्र (सीओई) योजना के अंतर्गत ग्‍यारह (11) आईटीआई को पहले ही अपना लिया गया है (जम्‍मू व कश्‍मीर में 5, उत्‍तराखंड में 4 और अरूणाचल प्रदेश में 2)

अनेक सक्रिय पूर्व उपायों में शामिल हैं ढांचागत विकास, प्रशिक्षकों को प्रशिक्षण और आईटीआई के मेधावी प्रशिक्षणार्थियों के लिए अनूठी छात्रवृत्ति की संकल्‍पना एवं कार्यान्‍वयन करना, जिसका मूल्‍यांकन तिमाही आधार पर करके छात्रवृत्ति देना है।

 

निर्माणाधीन परियोजनाएं :

4502 मेगावाट की कुल स्थापित क्षमता के साथ निम्नलिखित 10 परियोजनाओं पर निर्माण गतिविधियां  जोर-शोर से चल रही हैं:-

1. चुटक जलविद्युत परियोजना (44 मेगावाट), जम्मू एवं कश्मीर

§  बैराज कंक्रीटिंग, हेड रेस टनल (एचआरटी) व सर्जशॉफ्ट लाइनिंग का कार्य पूरा।

§  प्रैशर-शाफ्ट कंक्रीटिंग का कार्य प्रगति पर।

§  सभी रेडियल गेट्स के उत्‍थापन कार्य पूरा ।

§  परियोजना को अगस्‍त, 2011 तक संचालित करने का कार्यक्रम है।

 

2. चमेरा जलविद्युत परियोजना चरण-III (231 मेगावाट), हिमाचल प्रदेश 

§  बांध कंक्रीटिंग, एचआरटी लाइनिंग और पावर हाऊस के सिविल कार्य लगभग पूरे हो गए हैं।

§  रेडियल गेट्स, इनटेक गेट्स व ट्रैश रैक आदि का उत्‍थापन कार्य प्रगति पर।

§  यूनिट 1 व 2 के कमशिनिंग पूर्व कार्य पूरे।

§  यूनिट-3 की बोक्सिंग-अप व रन-आउट टेस्टिंग प्रगति पर।

§  परियोजना को अगस्‍त, 2011 तक संचालित करने का कार्यक्रम है।

 

3. निम्मो बाजगो जलविद्युत परियोजना (45 मेगावाट ), जम्मू एवं कश्मीर

§  सेल्‍युलर वॉल की कंक्रीटिंग और पावर हाऊस का उत्‍खनन कार्य पूरा

§  बॉंध व विद्युत गृह की कंक्रीटिंग प्रगति पर

§  पेनस्‍टॉक की लाइनर और सभी रेडियल गेट्स का उत्‍थापन कार्य पूरा ।

§  यूनिट-1, 2 तथा 3 के स्‍पाइरल केस का उत्‍थापन पूरा

§  परियोजना को अक्टूबर, 2011 तक संचालित करने का कार्यक्रम है।

 

4. उड़ी जलविद्युत परियोजना चरण-II (240 मेगावाट), जम्मू एवं कश्मीर

§  बांध कंक्रीटिंग, एचआरटी लाइनिंग, पावर हाउस की कंक्रीटिंग, सर्ज-शाफ्ट लाइनिंग तथा टीआरटी ओवर्ट लाइनिंग लगभग पूरी ।

§  रेडियल गेट्स का उत्‍थापन, प्रैशर शाफ्ट लाइनर आदि का कार्य प्रगति पर ।

§  यूनिट-1 का बाक्सिंग अप कार्य पूर्ण और यूनिट-2 का बाक्सिंग अप कार्य प्रगति पर ।

§  परियोजना को दिसम्बर, 2011 तक संचालित करने का कार्यक्रम है ।

 

5. पार्बती जलविद्युत परियोजना चरण-III (520 मेगावाट ), हिमाचल प्रदेश

§  बांध में रॉक फिलिंग और स्पिलवे कंट्रोल स्‍ट्रक्‍चर कंक्रीटिंग का कार्य पूरा होने के अंतिम चरण में है।

§  हेड रेस टनल का उत्‍खनन कार्य पूरा और ओवर्ट कंक्रीटिंग का कार्य प्रगति पर है।

§  टेल रेस टनल की ओवर्ट लाइनिंग लगभग पूरी एवं पावर हाऊस कंक्रीटिंग का कार्य प्रगति पर ।

§  यूनिट-1 में जनरेटर बैरल की कंक्रीटिंग का कार्य पूरा । यूनिट-2 की स्‍पाइरल केसिंग का उत्‍थापन कार्य पूरा ।

§  परियोजना को जनवरी, 2012 में (एक यूनिट) संचालित करने का कार्यक्रम है

 

6. तीस्ता लो डैम जलविद्युत परियोजना चरण-III (132 मेगावाट), पश्चिम बंगाल

§  इंनटेक, सैल्‍युलर वॉल और पावर हाऊस की कंक्रीटिंग का कार्य लगभग पूरा ।

§  बैराज कंक्रीटिंग का कार्य प्रगति पर ।

§  पेनस्‍टॉक का उत्‍थापन कार्य पूरा ।

§  रेडियल गेट्स, इनटेक गेट और फिश लैडर गेट्स का उत्‍थापन कार्य प्रगति पर ।

§  यूनिट-1 की यूनिट एक्सिस एलाइनमेंट और बॉक्‍स-अप का कार्य पूरा। यूनिट-2 का कार्य प्रगति पर ।

§  परियोजना को मई, 2012 में संचालित करने का कार्यक्रम है, जबकि इसकी एक यूनिट को      मार्च, 2012 में संचालित करने का कार्यक्रम है ।

 

7. तीस्ता लो डैम जलविद्युत परियोजना चरण-IV (160 मेगावाट), पश्चिम बंगाल

§  डैम स्पिलवे और पावर डैम का उत्‍थापन कार्य पूरा ।

§  स्पिलवे ग्‍लेसिस, डैम पियर्स, पावर डैम, पावर हाऊस और इनटेक स्‍टूक्‍चर की कंक्रीटिंग प्रगति पर ।

§  पेनस्‍टॉक लाइनर, रेडियल गेट्स और फ्लशिंग गेट्स का उत्‍थापन कार्य प्रगति पर

§  सभी यूनिटों में ड्राफ्ट ट्यूब लाइनर का उत्‍थापन कार्य पूरा हो गया है

§  यूनिट 1 व 2 की स्‍पाइरल केसिंग का उत्‍थापन कार्य प्रगति पर ।

§  इस परियोजना को दिसंबर, 2012 में संचालित करने का कार्यक्रम है ।

 

8. पार्बती जलविद्युत परियोजना चरण-II (800 मेगावा), हिमाचल प्रदेश

§  डैम कंक्रीटिंग और एचआरटी उत्‍खनन का लगभग 85% कार्य पूरा

§  एचआरटी कंक्रीटिंग लाइनिंग का 46% और पावर हाऊस कंक्रीटिंग का 39% कार्य पूरा

§  पावर हाऊस की कंक्रीटिंग कार्य प्रगति पर ।

§  परियोजना को जुलाई, 2014 तक संचालित करने का कार्यक्रम है।  

 

9. सुबानसिरी लोअर जलविद्युत परियोजना (2000 मेगावाट), अरूणाचल प्रदेश

§  बांध उत्‍खनन का 94% और बांध कंक्रीटिंग का 34% कार्य पूरा ।

§  एचआरटी हेडिंग उत्खनन का 90% तथा एचआरटी कंक्रीट लाइनिंग का 29% कार्य पूरा

§  पावर हाऊस कंक्रीटिंग का 32% कार्य पूरा

§  कार्यस्‍थल कार्यशाला में प्रैशर शॉफ्ट लाइनर के निर्माण का कार्य प्रगति पर है और 9% उत्‍थापन कार्य पूरा हो गया है ।

§  इस परियोजना को अगस्‍त, 2014 में संचालित करने का कार्यक्रम है ।

 

 

 

10. किशनगंगा जलविद्युत परियोजना (330 मेगावाट), जम्मू एवं कश्मीर

§  एचआरटी की पहुंच के लिए एडिट-1, एचआरटी के लिए इनलेट एडिट और प्रैशर-शाफ्ट के लिए एडिट-1 का उत्‍खनन कार्य पूरा हो गया है ।

§  पावर हाऊस के लिए मुख्‍य पहुंच सुरंग का उत्‍खनन, टीबीएम एडिट का भूमिगत उत्‍खनन और एचआरटी के विभिन्‍न मुहानों पर उत्‍खनन का कार्य प्रगति पर है ।

§  स्पिलवे उत्‍खनन का कार्य भी प्रारंभ हो गया है और प्रगति पर है ।

§  परियोजना को जनवरी, 2016 में संचालित करने का कार्यक्रम है । 

  

प्राप्त पुरस्कार तथा सम्मान :

एनएचपीसी को वर्ष 2010-11 के दौरान विभिन्‍न प्रतिष्ठित पुरस्कार प्राप्त हुए हैं । उनमें से कुछ महत्वपूर्ण पुरस्कारों का विवरण निम्नानुसार है -

 

  • एनएचपीसी को सामाजिक व सामुदायिक प्रभाव के लिए पावर युटिलिटिज काउँसिल द्वारा इंडिया पावर अवार्ड 2010 से कारपोरेट सामाजिक दायित्‍व के अंतर्गत किए गए उत्‍कृष्‍ट कार्य के लिए सम्‍मानित किया गया ।
  • एनएचपीसी को दिनांक 21.02.2011 को द्वितीय इंफ्रास्‍ट्रक्‍चर अवार्ड्स में बेस्‍ट पीएसयू इन क्रिएटिंग ऑल्‍टरनेटिव एनर्जी अवार्ड्से सम्‍मानित किया गया ।
  • भारतीय अर्थ-व्‍यवस्‍था में दिए गए योगदान के लिए एनएचपीसी को डन एंड ब्रॉड स्‍ट्रीट-रोल्‍टा कारपोरेट अवार्ड्स 2010 के अंतर्गत पावर सैक्‍चर श्रेणी में शीर्ष भारतीय कंपनी के तौर पर पुरस्‍कृत किया गया ।
  • दलाल स्‍ट्रीट इनवेस्‍टमेंट जर्नल द्वारा नॉन-मैन्युफैक्‍चरिंग मिनि रत्‍न कैटेगरी में जेंटल जाइन्‍टस अवार्ड प्रदान कया गया।
  • दिनांक 07.03.2011 को सामाजिक उत्‍तरदायित्‍व श्रेणी के अंतर्गत सीआईडीसी विश्‍वकर्मा अवार्ड 2010 देकर सम्‍मानित किया गया। यह अवार्ड एनएचपीसी द्वारा अपनाए गए बेहतरीन कार्य-व्‍यवहार और इसके द्वारा भारतीय निर्माण उद्योग को दिए गए समग्र योगदान के लिए दिया गया है।
  • उत्‍कृष्‍ट राजभाषा कार्यान्‍वयन के लिए इंदिरा गॉंधी राजभाषा पुरस्‍कार कार्यक्रम के अंतर्गत गृह मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा क्षेत्र में अवस्थित सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों के मध्‍य एनएचपीसी को प्रथम पुरस्‍कार इंदिरा गॉंधी राजभाषा शील्‍ड से वर्ष 2008-09 के लिए सम्‍मानित किया गया ।
  • विद्युत क्षेत्र के कार्यालयों के मध्‍य एनएचपीसी को उत्‍कृष्‍ट राजभाषा कार्यान्‍वयन कार्य के लिए       वर्ष 2008-09 के लिए प्रथम पुरस्‍कार और वर्ष 2009-10 के लिए द्वितीय पुरस्‍कार से सम्‍मानित किया गया।

 

*****

फरीदाबाद

27.05.2011

 


अनुबंध -

निर्माणाधीन परियोजनाएं

 

परियोजना

राज्य

क्षमता

निम्मो-बाजगो

जम्मू एवं कश्मीर

45 मेगावाट

चुटक

जम्मू एवं कश्मीर

44 मेगावाट

किशनगंगा

जम्मू एवं कश्मीर

330 मेगावाट

उड़ी-।।

जम्मू एवं कश्मीर

240 मेगावाट

पार्बती-।।

हिमाचल प्रदेश

800 मेगावाट

चमेरा-।।।

हिमाचल प्रदेश

231 मेगावाट

पार्बती-।।।

हिमाचल प्रदेश

520 मेगावाट

तीस्ता लो डैम-।।।

पश्चिम बंगाल

132 मेगावाट

तीस्ता लो डैम - IV

पश्चिम बंगाल

160 मेगावाट

सुबानसिरी लोअर

अरूणाचल प्रदेश

2000 मेगावाट

 

कुल

4502 मेगावाट

 

सरकार से मंजूरी अधीन परियोजनाएं

 

परियोजना

राज्य

क्षमता

कोटली भेल -I

उत्तराखंड

195 मेगावाट

कोटली भेल -I बी

उत्तराखंड

320 मेगावाट

कोटली भेल-।।

उत्तराखंड

530 मेगावाट

दिबांग

अरूणाचल प्रदेश

3000 मेगावाट

तवांग-।

अरूणाचल प्रदेश

600 मेगावाट

तवांग-।।

अरूणाचल प्रदेश

800 मेगावाट

तीस्‍ता-IV

सिक्किम

520 मेगावाट

लोकतक डाउनस्ट्रीम (जेवी)1

मणिपुर

66 मेगावाट

पकल-दुल एवं अन्य परियोजनाएं (जेवी)2

जम्मू एवं कश्मीर

2120 मेगावाट

तिपाईमुख(जेवी)3

मणिपुर

1500 मेगावाट

 

कुल

9651 मेगावाट

 

    1 एनएचपीसी तथा मणिपुर सरकार के मध्य संयुक्‍त उपक्रम ।

    2 एनएचपीसी, जेकेएसपीडीसी तथा पीटीसी के मध्य प्रोमोटर्स करार पर 21.12.2010 को हस्ताक्षर किए गए

    3 एनएचपीसी, एसजेवीएनएल तथा मणिपुर सरकार के मध्य 28.04.10 को समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर

      किए गए

 
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